Otlu ma oohiya ilayka mina alkitabi waaqimi alssalata inna alssalata tanha 'ani alfahshai waalmunkari walathikru Allahi akbaru waAllahu ya'lamu ma tasna'oona (al-ʿAnkabūt 29:45)
Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:
उस किताब को पढ़ो जो तुम्हारी ओर प्रकाशना के द्वारा भेजी गई है, और नमाज़ का आयोजन करो। निस्संदेह नमाज़ अश्लीलता और बुराई से रोकती है। और अल्लाह का याद करना तो बहुत बड़ी चीज़ है। अल्लाह जानता है जो कुछ तुम रचते और बनाते हो
English Sahih:
Recite, [O Muhammad], what has been revealed to you of the Book and establish prayer. Indeed, prayer prohibits immorality and wrongdoing, and the remembrance of Allah is greater. And Allah knows that which you do. ([29] Al-'Ankabut : 45)
1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi
(ऐ रसूल) जो किताब तुम्हारे पास नाज़िल की गयी है उसकी तिलावत करो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो बेशक नमाज़ बेहयाई और बुरे कामों से बाज़ रखती है और ख़ुदा की याद यक़ीनी बड़ा मरतबा रखती है और तुम लोग जो कुछ करते हो ख़ुदा उससे वाक़िफ है
2 Azizul-Haqq Al-Umary
आप उस पुस्तक को पढ़ें, जो वह़्यी (प्रकाशना) की गयी है आपकी ओर तथा स्थापना करें नमाज़ की। वास्तव में, नमाज़ रोकती है निर्लज्जा तथा दुराचार से और अल्लाह का स्मरण ही सर्व महान है और अल्लाह जानता है, जो कुछ तुम करते[1] हो।