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وَلِكُلِّ اُمَّةٍ جَعَلْنَا مَنْسَكًا لِّيَذْكُرُوا اسْمَ اللّٰهِ عَلٰى مَا رَزَقَهُمْ مِّنْۢ بَهِيْمَةِ الْاَنْعَامِۗ فَاِلٰهُكُمْ اِلٰهٌ وَّاحِدٌ فَلَهٗٓ اَسْلِمُوْاۗ وَبَشِّرِ الْمُخْبِتِيْنَ ۙ  ( الحج: ٣٤ )

And for every
وَلِكُلِّ
और वास्ते हर
nation
أُمَّةٍ
उम्मत के
We have appointed
جَعَلْنَا
मुक़र्रर किया हमने
a rite
مَنسَكًا
क़ुरबानी करना
that they may mention
لِّيَذْكُرُوا۟
ताकि वो ज़िक्र करें
(the) name
ٱسْمَ
नाम
(of) Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह का
over
عَلَىٰ
उस पर
what
مَا
जो
He (has) provided them
رَزَقَهُم
उसने रिज़्क़ दिया उन्हें
of
مِّنۢ
चौपायों में से
(the) beast
بَهِيمَةِ
चौपायों में से
(of) cattle
ٱلْأَنْعَٰمِۗ
मवेशियों के
And your God
فَإِلَٰهُكُمْ
तो इलाह तुम्हारा
(is) God
إِلَٰهٌ
इलाह है
One
وَٰحِدٌ
एक ही
so to Him
فَلَهُۥٓ
तो उसी के लिए
submit
أَسْلِمُوا۟ۗ
फ़रमाबरदार हो जाओ
And give glad tidings
وَبَشِّرِ
और ख़ुशख़बरी दे दीजिए
(to) the humble ones
ٱلْمُخْبِتِينَ
आजिज़ी करने वालों को

Walikulli ommatin ja'alna mansakan liyathkuroo isma Allahi 'ala ma razaqahum min baheemati alan'ami failahukum ilahun wahidun falahu aslimoo wabashshiri almukhbiteena (al-Ḥajj 22:34)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और प्रत्येक समुदाय के लिए हमने क़ुरबानी का विधान किया, ताकि वे उन जानवरों अर्थात मवेशियों पर अल्लाह का नाम लें, जो उसने उन्हें प्रदान किए हैं। अतः तुम्हारा पूज्य-प्रभु अकेला पूज्य-प्रभु है। तो उसी के आज्ञाकारी बनकर रहो और विनम्रता अपनानेवालों को शुभ सूचना दे दो

English Sahih:

And for every [religious] community We have appointed a rite [of sacrifice] that they may mention the name of Allah over what He has provided for them of [sacrificial] animals. For your god is one God, so to Him submit. And, [O Muhammad], give good tidings to the humble [before their Lord] ([22] Al-Hajj : 34)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और हमने तो हर उम्मत के वास्ते क़ुरबानी का तरीक़ा मुक़र्रर कर दिया है ताकि जो मवेशी चारपाए खुदा ने उन्हें अता किए हैं उन पर (ज़िबाह के वक्त) ख़ुदा का नाम ले ग़रज़ तुम लोगों का माबूद (वही) यकता खुदा है तो उसी के फरमाबरदार बन जाओ