وَالَّذِيْنَ يُتَوَفَّوْنَ مِنْكُمْ وَيَذَرُوْنَ اَزْوَاجًاۖ وَّصِيَّةً لِّاَزْوَاجِهِمْ مَّتَاعًا اِلَى الْحَوْلِ غَيْرَ اِخْرَاجٍ ۚ فَاِنْ خَرَجْنَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِيْ مَا فَعَلْنَ فِيْٓ اَنْفُسِهِنَّ مِنْ مَّعْرُوْفٍۗ وَاللّٰهُ عَزِيْزٌ حَكِيْمٌ ( البقرة: ٢٤٠ )
Waallatheena yutawaffawna minkum wayatharoona azwajan wasiyyatan liazwajihim mata'an ila alhawli ghayra ikhrajin fain kharajna fala junaha 'alaykum fee ma fa'alna fee anfusihinna min ma'roofin waAllahu 'azeezun hakeemun (al-Baq̈arah 2:240)
Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:
और तुममें से जिन लोगों की मृत्यु हो जाए और अपने पीछे पत्नियों छोड़ जाए, अर्थात अपनी पत्नियों के हक़ में यह वसीयत छोड़ जाए कि घर से निकाले बिना एक वर्ष तक उन्हें ख़र्च दिया जाए, तो यदि वे निकल जाएँ तो अपने लिए सामान्य नियम के अनुसार वे जो कुछ भी करें उसमें तुम्हारे लिए कोई दोष नहीं। अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
English Sahih:
And those who are taken in death among you and leave wives behind – for their wives is a bequest: maintenance for one year without turning [them] out. But if they leave [of their own accord], then there is no blame upon you for what they do with themselves in an acceptable way. And Allah is Exalted in Might and Wise. ([2] Al-Baqarah : 240)
1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi
उसी तरह ख़ुदा को याद करो और तुम में से जो लोग अपनी बीवियों को छोड़ कर मर जाएँ उन पर अपनी बीबियों के हक़ में साल भर तक के नान व नुफ्के (रोटी कपड़ा) और (घर से) न निकलने की वसीयत करनी (लाज़िम) है पस अगर औरतें ख़ुद निकल खड़ी हो तो जायज़ बातों (निकाह वगैरह) से कुछ अपने हक़ में करे उसका तुम पर कुछ इल्ज़ाम नही है और ख़ुदा हर यै पर ग़ालिब और हिक़मत वाला है